ISRO में वैज्ञानिकों के इस्तीफों से चिंता, प्राइवेट स्पेस कंपनियों की ओर बढ़ रहा रुझान; सरकार ने कड़े किए नियम

ISRO में वैज्ञानिकों के इस्तीफों से चिंता, प्राइवेट स्पेस कंपनियों की ओर बढ़ रहा रुझान; सरकार ने कड़े किए नियम

1000262987

Resignations of scientists at ISRO spark concern

बेंगलुरु। Resignations of scientists at ISRO spark concern, भारत का अंतरिक्ष विभाग (DoS) इस समय बड़ी उथल-पुथल मची हुई है। इसरो के कई सीनियर साइंटिस्ट और टेक्निकल एक्सपर्ट इस्तीफा दे रहे हैं और प्राइवेट स्पेस कंपनियों की तरफ जा रहे हैं। एक के बाद एक पिछले एक साल में करीब 100 120 वैज्ञानिकों ने इस्तीफे दिए हैं।

इसरो से वैज्ञानिकों के इस तरह के इस्तीफे को रोकने के लिए भारत सरकार ने बेहद सख्त कदम उठाया है। अंतरिक्ष विभाग ने एक नया निर्देश जारी किया है। जिसके तहत अब ऐसे किसी भी मामले को केंद्र स्तर पर सीधे मंजूरी नहीं मिलेगी, बल्कि अंतिम मंजूरी के लिए हेडक्वार्टर भेजा जाएगा।

दरअसल, हाल ही में इस्तीफा देने वालों में गगनयान और चंद्रयान-3 जैसी बड़ी परियोजनाओं के कई प्रोजेक्ट डायरेक्टर और मैनेजर्स भी शामिल हैं। इसको लेकर सरकार का मानना है कि इस तरह अचानक काम छोड़ने से राष्ट्रीय स्तर के प्रोजेक्ट्स पर बुरा असर पड़ रहा है।

जिसके चलते सरकार ने वैज्ञानिकों के इस्तीफे और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के नियमों को बेहद सख्त बना दिया गया है। हालांकि, इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताते हुए कहा है कि इससे परियोजनाओं को अचानक होने वाले नुकसान से बचाया जा सकेगा

ISRO में वैज्ञानिकों के इस्तीफे पर रोक

वैज्ञानिकों के इस्तीफे रोकने के लिए 14 जुलाई को एक नया अंदरूनी फरमान जारी किया है। इंटरनल मेमोरेंडम में कहा गया है कि हाई-प्रोफाइल प्रोजेक्ट्स से जुड़े 'ग्रुप A' के साइंटिफिक और टेक्निकल स्टाफ के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) या इस्तीफे के अनुरोधों को अब रूटीन के तौर पर आसानी से स्वीकार नहीं किया जाएगा।

विभाग ने चेतावनी दी है कि हाल के दिनों में नौकरी छोड़ने वाले वैज्ञानिकों की संख्या में आई तेजी के कारण राष्ट्रीय महत्व की बेहद महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर गंभीर असर पड़ा है।

इसको लेकर सरकार ने निर्देशकों (डायरेक्टर्स) को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि जब तक संबंधित स्पेस मिशन पूरी तरह संपन्न नहीं हो जाते, तब तक वे अपनी तरफ से ऐसे किसी भी अनुरोध को मंजूरी न दें। वह इस्तीफे या वीआरएस के हर मामले को अपनी उचित सिफारिशों के साथ अंतिम निर्णय के लिए सीधे मुख्यालय को फॉरवर्ड करें।

कितने वैज्ञानिकों ने छोड़ी नौकरी?

भारतीय अंतरिक्ष विभाग (DoS) ने यह नहीं बताया है कि कितने वैज्ञानिकों ने नौकरी छोड़ी है, लेकिन कई सूत्रों का कहना है कि पिछले एक साल में 100-120 लोगों ने नौकरी छोड़ी है। इस्तीफा देने वालों में विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर के LVM-3 प्रोजेक्ट डायरेक्टर विक्टर जोसेफ, UR राव सैटेलाइट सेंटर के SpaDeX प्रोजेक्ट डायरेक्टर और चंद्रयान-3 प्रोजेक्ट मैनेजर (सिमुलेशन) आदित्य रल्लापल्ली शामिल हैं।

हालांकि, नौकरी छोड़ने वालों की संख्या ISRO के 14,600 से ज्यादा कर्मचारियों की कुल संख्या का एक छोटा सा हिस्सा है, लेकिन इससे इसके कुछ सबसे अहम सेंटर्स पर असर पड़ा है। 1,339 कर्मचारियों वाले UR राव सैटेलाइट सेंटर में 80 लोगों ने नौकरी छोड़ी है, जबकि पिछले फाइनेंशियल ईयर के अंत तक ISRO के सबसे बड़े सेंटर (4,577 कर्मचारियों वाले) विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर से कम से कम 20 वैज्ञानिकों ने इस्तीफा दिया है।

क्यों इसरो छोड़ रहे साइंटिस्ट?

बता दें कि भारत का प्राइवेट स्पेस सेक्टर इस समय बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में अनुभवी वैज्ञानिकों की डिमांड बढ़ गई है। प्राइवेट कंपनियां मुह मांगा पैसा दे रही हैं। यही वजह है कि इसरो के टैलेंटेड साइंटिस्ट प्राइवेट सेक्टर की तरफ भाग रहे हैं।